कहानी ईशान और सानवी ठक्कर के इर्द-गिर्द घूमती है। ईशान, सानवी की कंपनी में मैनेजर है और उससे प्यार करता है, लेकिन सानवी आज भी अपने पहले प्यार मोहित की यादों में रहती है। सात साल पहले एक रात शराब के नशे में उनके बीच संबंध बने, जिससे उनकी बेटी ईशा

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सानवी और ईशान: तीन मौकों का खेल
​कहानी का सारांश:
कहानी ईशान और सानवी ठक्कर के इर्द-गिर्द घूमती है। ईशान, सानवी की कंपनी में मैनेजर है और उससे प्यार करता है, लेकिन सानवी आज भी अपने पहले प्यार मोहित की यादों में रहती है। सात साल पहले एक रात शराब के नशे में उनके बीच संबंध बने, जिससे उनकी बेटी ईशा का जन्म हुआ। सानवी ने आज तक ईशा को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार नहीं किया और ईशान पर जबरदस्ती का आरोप लगाती रही। [01:23], [04:45]
​बेटी ईशा अपनी माँ का प्यार पाने के लिए तरसती है। ईशान तय करता है कि वे घर छोड़ देंगे, लेकिन ईशा के कहने पर वह सानवी को 'तीन मौके' देने का फैसला करता है। [07:25] कहानी में मोड़ तब आता है जब सानवी का पहला प्यार मोहित कंपनी में सीनियर मैनेजर बनकर लौटता है और ईशान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है। [08:54]
​सानवी बार-बार अपनी बेटी का दिल तोड़ती है। वह स्कूल की 'पेरेंट्स-टीचर मीटिंग' (PTM) में आने का वादा करती है, लेकिन वहां वह ईशा के लिए नहीं बल्कि मोहित के बेटे के लिए पहुँचती है। [15:37] ईशा का दिल एक बार फिर टूट जाता है और ईशान निराश हो जाता है क्योंकि सानवी अब अपने आखिरी मौके की ओर बढ़ रही है।

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